हरदा। ग्राम पंचायत पलासनेर में भ्रष्टाचार का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। अपनी कमियों को छिपाने के लिए पत्रकारों को निशाना बनाने की राजनीति ने जिले के मीडिया जगत में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। सोमवार को जिले के समस्त पत्रकारों ने लामबंद होकर कलेक्टर व अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपा और सरपंच श्रीमती सरोज चौरसिया द्वारा लगाए गए आरोपों को 'मनगढ़ंत और षड्यंत्रकारी' करार दिया।
सच दिखाने पर पत्रकारों की झूठी शिकायत,प्रशासन को गुमराह?
पत्रकारों ने ज्ञापन में स्पष्ट किया गया कि पत्रकार अमित बिल्ले और राजेंद्र बिल्लौरे केवल अपने संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन कर रहे थे। पलासनेर पंचायत में वित्तीय अनियमितताओं को लेकर ग्रामीणों ने स्वयं कलेक्टर और कमिश्नर से लिखित शिकायत की थी। पत्रकारों ने केवल उन्हीं दस्तावेजी साक्ष्यों और अधिकारियों की बाइट के आधार पर खबरें प्रकाशित कीं। अब जब जांच की आंच सरपंच तक पहुँच रही है, तो प्रशासन का ध्यान भटकाने के लिए पत्रकारों पर 50 हजार रुपये मांगने का झूठा आरोप मढ़ा जा रहा है।
मौत पर 'सियासत': सहानुभूति की आड़ में बचने का खेल-
पत्रकारों ने सचिव ओमप्रकाश गुर्जर के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया, लेकिन साथ ही सरपंच की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए। ज्ञापन के अनुसार, सरपंच ने सचिव की मृत्यु का फायदा उठाते हुए अंतिम संस्कार से पहले ही 'सहानुभूति कार्ड' खेलना शुरू कर दिया। सचिव-सरपंच संघ को गुमराह कर पत्रकारों के खिलाफ अनैतिक दबाव बनाया जा रहा है ताकि पंचायत में चल रही रिकवरी की जांच प्रभावित हो सके।
पत्रकारों ने प्रशासन से कहां कि जब तक सचिव जीवित थे, उन्होंने कभी किसी पत्रकार के खिलाफ मानसिक दबाव या वसूली की शिकायत नहीं की। अब उनकी मृत्यु के बाद उन पर राजनीति करना और पत्रकारों को फंसाना बेहद निंदनीय है।
कलेक्टर से पत्रकारों की दो टूक मांगें:
पत्रकार संघ ने प्रशासन के सामने निष्पक्ष जांच के लिए कुछ अहम बिंदु रखे हैं:
कॉल डिटेल रिकार्ड और लोकेशन की जांच: सरपंच, शिकायतकर्ताओं और संबंधित अधिकारियों की कॉल डिटेल निकाली जाए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।
दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन:
ग्रामीणों की शिकायत अनुसार, गुणवत्ताहीन सड़क, स्टॉप डेम,स्ट्रीट लाइट,तलाब,सरपंच के बेटे ओर फर्जी मजदूर दर्शाकर खाते में सरकारी राशि डाली और डक बेल निर्माण में हुए भ्रष्टाचार की जांच किसी के दबाव में आए बिना पूर्ण की जाए।
झूठे आरोपों पर एक्शन:
पत्रकारों ने कहा कि यदि सरपंच के आरोप झूठे पाए जाते हैं, तो उन पर मानहानि और प्रशासन को गुमराह करने का केस दर्ज हो।इसी तहत पूर्व में भी सरपंच द्वारा कई लोगों की झूठी शिकायत की गई। लेकिन कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर पाई।
चौथा स्तंभ डरेगा नहीं:
समस्त पत्रकार साथियों ने एक स्वर में कहा कि यदि प्रशासन ने किसी भी संगठन के दबाव में आकर एकतरफा कार्यवाही की, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की आवाज को झूठी एफआईआर के डर से दबाया नहीं जा सकता। पत्रकारों ने कहा कि वे लगातार जनहित के मुद्दे शासन प्रशासन के समक्ष जनता की आवाज पहुंचते रहेंगे।इस दौरान पत्रकार साथी मेहमुद चिस्ती, प्रदीप शर्मा,फैयाज खान,गोपाल शुक्ला,कीर्तन ओनकर,सुनील राठौर,बसीम खान,अकील खान, संजय योगी, गोविंद सकतपुरिया, कपिल शर्मा,अनील मालवीया, संजू दूबे,शेख अफ़रोज़,अरूण तिवारी, अरूण मालवीय,राजेंद्र बिल्लौरे,अमित बिल्ले,देवीसिंह सेजकर, वैभव चौधरी,अमजद खान,ब्रजेश पाटिल,आनन्द गौर, शाहरुख बाबा, पुरुषोत्तम कलम, कपिल भूसारे सहित बड़ी संख्या में पत्रकार मौजूद रहे।
