रविवार भी ड्यूटी, परिवार से दूरी और बीमारियों का खतरा—बिजली विभाग में आउटसोर्स कर्मचारियों का खुला शोषण

शेख अफरोज हरदा/नर्मदापुरम (संवाददाता):बिजली विभाग में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों के साथ हो रहे कथित श्रमिक शोषण का मामला अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। विभाग में काम कर रहे कई आउटसोर्स कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर मीडिया को बताया कि उनसे रविवार जैसे साप्ताहिक अवकाश के दिन भी जबरन काम कराया जा रहा है। सवाल यह है कि जब कानून छुट्टी का अधिकार देता है, तो फिर यह खुला उल्लंघन किसके इशारे पर हो रहा है?

कर्मचारियों का कहना है कि वे मशीन नहीं हैं, उनके भी परिवार हैं, बच्चे हैं और सामाजिक जिम्मेदारियां हैं। सप्ताह में मिलने वाला एकमात्र अवकाश भी छीन लिया जाना न केवल अमानवीय है, बल्कि सीधे-सीधे श्रम कानूनों की धज्जियां उड़ाने जैसा है। कर्मचारियों के अनुसार विभाग में लगातार काम का दबाव बढ़ाया जा रहा है, स्टाफ की कमी के बावजूद अतिरिक्त जिम्मेदारियां थोप दी जाती हैं और मना करने पर नौकरी जाने का डर दिखाया जाता है।

आउटसोर्स कर्मचारियों ने बताया कि लगातार मानसिक और शारीरिक दबाव के कारण कई कर्मचारी हाई ब्लड प्रेशर, शुगर, तनाव और हार्ट अटैक जैसी गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। सवाल उठता है कि क्या विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? क्या किसी कर्मचारी की जान जाने के बाद ही प्रशासन नींद से जागेगा?

कर्मचारियों का कहना है कि 1 मार्च से श्रम विभाग द्वारा बनाए गए चार नए श्रम कानून लागू होने जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य मजदूरों को राहत और सुरक्षा देना है। लेकिन हकीकत यह है कि कानून लागू होने से पहले ही उनका खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। ऐसे में यह संदेह गहराता जा रहा है कि क्या ये कानून भी केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएंगे?

इस गंभीर मुद्दे पर जब भारतीय मजदूर संघ, हरदा-नर्मदापुरम संभाग के विभाग प्रमुख जितेंद्र सोनी से बातचीत की गई, तो उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि आउटसोर्स कर्मचारियों के शोषण को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जल्द ही बिजली विभाग के महाप्रबंधक के नाम एक सख्त ज्ञापन सौंपा जाएगा, जिसमें साप्ताहिक अवकाश, कार्य समय और स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाएगा।

जितेंद्र सोनी ने कहा कि 1 मार्च से लागू होने वाले श्रम कानून मजदूरों के हित में हैं और भारतीय मजदूर संघ इनका स्वागत करता है, लेकिन यदि इन कानूनों को जमीन पर लागू नहीं किया गया तो संगठन आंदोलन से भी पीछे नहीं हटेगा।

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या बिजली विभाग और प्रशासन इस श्रमिक शोषण पर तुरंत कार्रवाई करेगा या फिर आउटसोर्स कर्मचारियों की मजबूरी को यूं ही कुचला जाता रहेगा? मजदूरों की आवाज अब उठ चुकी है, और यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ तो यह मुद्दा जल्द ही बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।