शेख अफरोज टिमरनी।आदिवासी बहुल टिमरनी विधानसभा क्षेत्र में आजादी के 78 वर्ष बाद भी यदि शासकीय महाविद्यालय में अध्ययनरत अनुसूचित जनजाति एवं अनुसूचित जाति के छात्र-छात्राओं को छात्रावास जैसी मूलभूत सुविधा नहीं मिल पा रही है, तो इसका जिम्मेदार कौन है? यह सीधा सवाल जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस) ने टिमरनी प्रशासन से पूछा है। छात्रावास की मांग को लेकर जयस के नेतृत्व में छात्र-छात्राओं ने अनुविभागीय दंडाधिकारी टिमरनी को ज्ञापन सौंपते हुए प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए।
जयस ने सवाल किया कि जब टिमरनी क्षेत्र आदिवासी बाहुल्य घोषित है, तो फिर शासकीय महाविद्यालय टिमरनी में आज तक एसटी-एससी छात्राओं के लिए कन्या छात्रावास क्यों स्वीकृत नहीं किया गया? दूर-दराज के गांवों से आने वाली छात्राएं आखिर कब तक किराए के कमरों में असुरक्षित जीवन जीने को मजबूर रहेंगी? क्या प्रशासन यह चाहता है कि आर्थिक मजबूरी के कारण आदिवासी बेटियां पढ़ाई छोड़ दें?
ज्ञापन में यह भी पूछा गया कि आदिवासी बालक छात्रावास को आज तक किराए के भवन में क्यों चलाया जा रहा है? क्या स्थायी भूमि उपलब्ध कराना और सुरक्षित भवन बनवाना प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है? जर्जर और अव्यवस्थित भवनों में छात्रों को रखना क्या मानवाधिकारों का उल्लंघन नहीं है?
जयस ने प्रशासन से यह भी पूछा कि जब सरकार “डिजिटल इंडिया” और “नई शिक्षा नीति” की बात करती है, तब छात्रावासों में कंप्यूटर, लाइब्रेरी, निशुल्क वाई-फाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग की व्यवस्था क्यों नहीं की गई? क्या यह जानबूझकर आदिवासी छात्रों को मुख्यधारा की प्रतियोगिता से बाहर रखने की नीति है?
खेल मैदान और खेल सामग्री के अभाव पर भी सवाल उठाए गए। जयस ने कहा कि क्या प्रशासन को केवल इमारतें बनवानी हैं या छात्रों का सर्वांगीण विकास भी उसकी जिम्मेदारी है? हरदा जिले के छात्रावासों में खेल सुविधाओं की अनदेखी किसके आदेश पर की जा रही है?
इस दौरान जयस शिक्षा प्रभारी रोहित कुमरे ने कहा कि टिमरनी में छात्रावास का अभाव कोई नई समस्या नहीं है, बल्कि वर्षों से चली आ रही प्रशासनिक उदासीनता का परिणाम है। यदि प्रशासन अब भी आंख मूंदे बैठा रहा, तो जयस शांतिपूर्ण तरीके से नहीं बल्कि चरणबद्ध आंदोलन के माध्यम से सड़क से सदन तक अपनी आवाज बुलंद करेगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
कार्यक्रम के दौरान जयस संरक्षक धनसिंह भलावी, जयस प्रभारी राकेश काकोड़िया, शिक्षा प्रभारी रोहित कुमरे, उपाध्यक्ष विनोद पदम, रमेश कलम, संदीप उइके सहित छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में मौजूद रहे। जयस ने स्पष्ट कर दिया कि अब सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि लिखित आदेश और निर्माण कार्य की शुरुआत चाहिए।

